काशी की तर्ज पर गाजीपुर में गूंजी गंगा आरती, नारी पंचदेवरा घाट पर उमड़ा हजारों श्रद्धालुओं का जनसैलाब

वैदिक मंत्रोच्चार और दीपों की अलौकिक छटा ने बांधा समां, हर वर्ष नियमित गंगा आरती कराने का लिया गया संकल्प

गाजीपुर। गंगा दशहरा के पावन अवसर पर सदर विधानसभा क्षेत्र के नारी पंचदेवरा गांव स्थित गंगा घाट पर शनिवार की संध्या ऐसा आध्यात्मिक और भव्य दृश्य देखने को मिला, जिसने लोगों को काशी की प्रसिद्ध गंगा आरती की याद दिला दी। मां गंगा के तट पर आयोजित भव्य गंगा आरती में हजारों श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। दीपों की रोशनी, घंटों की ध्वनि और वैदिक मंत्रोच्चार से पूरा घाट भक्तिमय माहौल में डूब गया। कार्यक्रम का आयोजन समाजसेवी एवं गंगा आरती संयोजक संतोष कुमार पाण्डेय ‘नन्हे’ के नेतृत्व में किया गया। इस अवसर पर काशी से आए पांच विद्वान आचार्यों द्वारा विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मां गंगा की आरती संपन्न कराई गई। जैसे ही आरती शुरू हुई, पूरा घाट “हर-हर गंगे” और “जय मां गंगे” के उद्घोष से गूंज उठा। आरती के दौरान दीपों की अलौकिक छटा और श्रद्धालुओं की आस्था ने वातावरण को पूरी तरह आध्यात्मिक बना दिया।

यह लगातार दूसरी बार आयोजित गंगा आरती थी, लेकिन इस बार श्रद्धालुओं की संख्या और आयोजन की भव्यता ने इसे विशेष बना दिया। आरती के बाद श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरण किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लेकर पुण्य लाभ अर्जित किया।

कार्यक्रम में क्षेत्र के कई गणमान्य लोग भी मौजूद रहे। प्रमुख रूप से यादव महासभा के जिलाध्यक्ष सुजीत साइकिल, नेता अरुण सिंह, समाजवादी महिला सभा की प्रदेश सचिव पुनीता सिंह खुशबू, पूर्व प्रधान रामबचन यादव, उमाशंकर यादव, सपा युवा नेता विश्वास धरकार उर्फ गोलू, पिंटू कुमार उर्फ काली मां कलाकार, जेपी यादव सहित अनेक सामाजिक और राजनीतिक हस्तियां उपस्थित रहीं। गंगा आरती संयोजक संतोष कुमार पाण्डेय ‘नन्हे’ ने कहा कि यह दिन गाजीपुर के लिए बेहद ऐतिहासिक और स्मरणीय है। उन्होंने बताया कि अब हर वर्ष गंगा दशहरा के अवसर पर नारी पंचदेवरा घाट पर नियमित रूप से भव्य गंगा आरती आयोजित की जाएगी। साथ ही घाट के सौंदर्यीकरण और विकास को लेकर भी व्यापक योजना बनाई जा रही है, ताकि यह स्थल आने वाले समय में पूर्वांचल का प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र बन सके। ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने भी इस आयोजन की जमकर सराहना की और इसे क्षेत्र की धार्मिक चेतना और सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने वाला प्रयास बताया।

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